ननों के मूत्र से बनी है ये दवाई…जाने पूरी ख़बर

NUN

नई दिल्ली । शायद सुनकर अजीब लगे लेकिन ये सच हैं कि  प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाली दवा में ननों के मूत्र का इस्तेमाल किया गया। नहीं तो चलिए हम आपको इस पूरे वाकये के दिलचस्प पहलुओं से रूबरू कराते हैं।

दरअसल, 1940 में इटली की एक दवा कंपनी में काम करने वाले एक वैज्ञानिक पिएरो दोनिन ने पाया कि मैनॉपॉज हासिल कर चुकी महिलाओं के पेशाब में पाए जाने वाले एफ़एसएच और एलएच में हार्मोंस की मात्रा ज्यादा होती है।इस शोध पर एक दशक तक किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन वियना में जन्मे वैज्ञानिक ब्रूनो लुलेनफेल्ड ने इस बारे में पढ़ा तो उन्होने दवा कंपनी के अधिकारियों से क्लिनिकल परीक्षण के लिए दवा तैयार करने को कहा। लेकिन समस्या यूरिन इकट्ठे करने की थी कि आखिर मैनॉपॉज हॉसिल कर चुकी महिलाओं का हजारों गैलन पेशाब कहां से लाया जाए।

आखिरकार उन्होने पोप से कहकर वृद्धाश्रम में रहने वाली ननो से हर दिन की यूरीन जमा करने के लिए कहा गया तब ट्रकों में ननों की पेशाब भरकर जाने लगी और फिर मेनोपॉज वाली दवाई बनाई गई ।

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