विदेश में बैंक खाते रखने वाले भारतीयों पर कस रहा शिकंजा

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विदेश में बैंक खाते रखने वाले भारतीयों को पिछले महीने से विदेशी फाइनैंशल इंस्टिट्यूशंस से लेटर और ईमेल मिल रहे हैं, जिनमें उनसे क्रिसमस से पहले अपना ‘टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस’ बताने को कहा गया है। इनमें कहा गया है कि अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो ये खाते खोलने वाले बैंक इन खाताधारकों के बारे में उनके पास जो भी जानकारी होगी, उसे वे भारत सरकार को दे देंगे।

ऐसे में कई खाताधारक दुविधा में पड़ गए हैं। उन्हें डर है कि अगर उन्होंने सवालों के जवाब दिए तो भारत का टैक्स डिपार्टमेंट इसका फायदा उठाकर कई सवाल दाग देगा। इनमें से कुछ लोग, खासतौर से वे लोग जिन्होंने टैक्स रिटर्न्स में अपनी विदेशी संपत्ति का जानबूझकर खुलासा नहीं किया था, एक चांस लेना चाहते हैं और बाद में सवाल किए जाने पर टैक्स डिपार्टमेंट को चैलेंज करने का मन बना रहे हैं।

टैक्स हेवंस में बैंक खाते खोलने वाले नॉन-रेजिडेंट इंडियंस को अब अपने मौजूदा टैक्स रेजिडेंसी स्टेटस का सबूत देना होगा। हालांकि जिन्होंने अपने खाते 31 दिसंबर 2015 के पहले बंद कर दिए थे, वे कम से कम अस्थायी तौर पर टैक्स अथॉरिटीज के ऐक्शन से बच जाएंगे।

इकनॉमिक टाइम्स ने इस संबंध में कुछ ईमेल्स देखे हैं। इन ईमेल्स में विदेशी बैंकों ने साफ-साफ बात की है। उदाहरण के लिए, एक बड़े ब्रिटिश बैंकिंग ग्रुप ने अपने क्लाइंट्स को याद दिलाया है, ‘अगर आपने 24 दिसंबर 2017 तक हमें जानकारी नहीं दी तो हमें आपके टैक्स परपजेज की जानकारी देनी पड़ सकती है और तब आपको सक्षम टैक्स अथॉरिटी के सामने अपने डिटेल्स रखने पड़ सकते हैं।’

बैंक खाताधारक के नाम, पता, जन्म तिथि के अलावा अकाउंट बैलेंस या कैलेंडर ईयर के अंत में उसकी वैल्यू, ग्रॉस इंट्रेस्ट अमाउंट, डिविडेंड और अकाउंट में जमा हुई दूसरी इनकम के साथ फाइनैंशल एकाउंट में सेल या रिडेम्प्शन से आई रकम की जानकारी साझा कर सकते हैं।

यह सब इन्फर्मेशन ऐंड कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड के ऑटोमैटिक एक्सचेंज का हिस्सा है, जिसके पालन पर ब्रिटेन, सिंगापुर, यूएई, मॉरीशस, जर्सी और भारत सहित 90 ज्यूरिस्डिक्शंस ने सहमति जताई है। सीआरएस लेजिस्लेशन के तहत दुनियाभर के फाइनैंशल इंस्टिट्यूशंस को टैक्सपेयर्स के फाइनैंशल अकाउंट इन्फर्मेशंस तक टैक्स अधिकारियों को एक्सेस देने में अहम भूमिका निभानी होती है।

चोकसी ऐंड चोकसी एलएलपी की सीनियर पार्टनर मितिल चोकसी ने कहा, ‘बैंक को अगर लगता है कि टैक्स से जुड़े मकसद के लिए किसी व्यक्ति के निवास वाले देश के बारे में उसके पास अपर्याप्त जानकारी है तो वह खुद भी संबंधित व्यक्ति से संपर्क कर सकता है। इंडियन टैक्स अथॉरिटीज भी विदेशियों की इसी तरह की डिटेल्स जुटा रही होंगी, जो दूसरे देशों के नागरिक होंगे, लेकिन भारत में रह रहे हैं या यहां काम कर रहे हैं।’

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