क्या हेलिकॉप्टर डील में पत्रकारों को घूस दी गई?

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नई दिल्ली: हेलिकॉप्टर सौदे में घूस के आरोपों पर बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने बड़ा दावा किया है. दावा ये है कि सौदे के लिए घूस की रकम कुछ पत्रकारों को भी दी गई. ये रकम 45 करोड़ हो सकती है. सवाल ये है कि क्या हेलिकॉप्टर डील में पत्रकारों को घूस दी गई?
वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की खरीद में घूस दिए जाने के विवाद को बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक नया मोड़ दे दिया है. सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक आगूस्ता सौदे में भारतीय मीडिया को भी खरीदने की कोशिश की गई थी. 28 अप्रैल को सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करके कहा है कि हो सकता है कि आगूस्ता सौदे में रिश्वत का एक हिस्सा मीडिया के लोगों दिया गया हो.
अपने ट्वीट के साथ ही सुब्रमण्यम स्वामी ने परफॉर्मेंसगुरूज की वेबसाइट पर छपे लेख का एक लिंक भी दिया है जिसमें दावा किया गया है कि आगुस्ता ने क्रिश्चियन माइकेल को भारतीय मीडिया को मैनेज करने के लिए साल 2010 से 2012 के बीच करीब 60 लाख यूरो यानी करीब 45 करोड़ रुपये दिए थे.
सुब्रमण्यम स्वामी ने पीगुरूज डॉट कॉम के जिस लेख का जिक्र किया है उसके मुताबिक हेलिकॉप्टर कंपनी फ़िनमेक्कैनिका और दुबई में माइकेल की कंपनी ग्लोबल सर्विसेज FZE के बीच 12 वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की खरीद के बाद एक करार हुआ था. उस करार के मुताबिक जनवरी 2010 के बाद आगूस्ता को 22 महीने तक 2 लाख 75 हजार यूरो यानी करीब 2 करोड़ रुपये हर महीने माईकल की कंपनी को देने थे.
पीगुरूज डॉट कॉम में छपी रिपोर्ट के मुताबिक क्रिश्चियन माइकेल तब Claridges होटल New Delhi में रुकते थे जो पत्रकारों और सरकारी बाबुओं की करीबी मुलाकातों के अड्डे के तौर पर जाना जाता है. इस दौरान भारतीय मीडिया में सौदे के बारे में कुछ नहीं छपा. मीडिया ने इस सौदे पर साल 2013 की शुरुआत में लिखना शुरू किया जब इटली की जांच एजेंसियों ने फ़िनमेक्कैनिका के मुखिया जूसेप्पे ओर्सी को गिरफ्तार कर लिया.
पीगुरूज डॉट कॉम में छपे इस लेख का हवाला देकर स्वामी ने भारतीय मीडिया पर गंभीर आरोप लगाया है. दरअसल सुब्रमण्यम स्वामी ने पीगुरूज डॉट कॉम की जिस रिपोर्ट का हवाला दिया है उसमें आगूस्ता और माइकेल की कंपनी के बीच हुए करार का एक कथित दस्तावेज भी छापा गया है जिसके मुताबिक माइकल की कंपनी को पैसे के बदले भारतीय मीडिया पर नजर रखने की सेवाएं देनी थी है.
प्रेस में होने वाली ऐसी विरोधी हलचलें जिससे सौदे पर असर पड़ सकता हो, उन्हें पहचानना और कंपनी को इसकी सूचना देना. कंपनी को प्रेस की विरोधी गतिविधियों से पड़ने वाले असर को कम करने की रणनीति बनाने में राय और मदद देना. कंपनी को नियमित तौर पर सौदे से जुड़ी प्रेस की गतिविधियों के बारे में नियमित रूप से रिपोर्ट देना.
सुब्रमण्यम स्वामी ने इसी रिपोर्ट को ट्विटर और फेसबुक पर पोस्ट करके आगूस्ता घूसकांड में भारतीय मीडिया को भी कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है.

By: एबीपी न्यूज |
Last Updated: Friday, 29 April 2016 4:23 PM
Source: http://abpnews.abplive.in/india-news/agusta-westland-scam-366091/

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