हरियाणा में जाट आरक्षण विधेयक पास

Khattar-on-Jaat-reservation-580x395.jpg

नई दिल्ली: हरियाणा विधानसभा में जाट आरक्षण विधेयक आम सहमति से पारित हो गया है. हरियाणा विधान सभा के चालू सत्र के दौरान आज यहां हरियाणा पिछड़ा वर्ग (सेवाओं तथा शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण) विधेयक, 2016 पारित किया गया. हरियाणा पिछड़े वर्ग(सेवाओं तथा शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण) अधिनियम, 2016 लागू करके पिछड़े वर्ग ब्लाक ‘ए’, पिछड़े वर्ग ब्लॉक ‘बी’ तथा पिछड़े वर्ग ब्लॉक ‘सी’ को वैधानिक दर्जा देने के उद्देश्य से हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल द्वारा यह विधेयक पेश किया गया और केन्द्र सरकार से इस अधिनियम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 31ख के साथ पठित 9वीं अनुसूची में शामिल करने का आग्रह किया गया है.
मुख्यमंत्री ने पहले ही यह आश्वासन दे दिया था कि यह विधेयक राज्य विधानसभा के चालू सत्र के दौरान लाया जाएगा. इस विधेयक में पिछड़े वर्ग ‘ए’, पिछड़े वर्ग ‘बी’ और पिछड़े वर्ग ‘सी’ के लिए श्रेणी I तथा II पदों के लिए अनुसूची I, II औरU III में आरक्षण को 10 प्रतिशत, 5 प्रतिशत और 5 प्रतिशत से बढ़ा कर क्रमश: 11 प्रतिशत, 6 प्रतिशत और 6 प्रतिशत करने का प्रावधान है. आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों के लिए पांच प्रतिशत के मौजूदा आरक्षण को भी बढ़ा कर सात प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है.
इस विधेयक में कहा गया है कि इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार समय-समय पर, जैसा यह आवश्यक समझे, व्यक्तियों के ऐसे प्रवर्ग या प्रवर्गों के लिए हॉरिजॉन्टल आरक्षण उपलब्ध करवा सकती है.
विभिन्न जातियों के सामाजिक और आर्थिक विषयों का समाधान करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 340 के अधीन उपबन्ध के अनुसार, हरियाणा सरकार द्वारा माननीय न्यायाधीश श्री गुरनाम सिंह(सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता के अधीन 7 सितम्बर,1990 को इसका प्रथम पिछड़ा वर्ग आयोग स्थापित किया गया. आयोग ने 30 दिसम्बर, 1990 को अपनी रिपोर्ट पेश की और राज्य सरकार द्वारा आयोग की सिफारिशें स्वीकार कर ली गई. राज्य सरकार द्वारा अपनी अधिसूचना संख्या 299-एसडब्ल्यू(1), दिनांक 5 फरवरी,1991 द्वारा 10 जातियों अर्थात् अहीर, बिश्नोई, मेव, गुज्जर, जाट, जट-सिख, रोड़, सैनी, त्यागी तथा राजपूत को पिछड़े वर्ग की सूची में शामिल किया गया. राज्य सरकार द्वारा 5 अप्रैल, 1991 के अनुदेश द्वारा इन जातियों को आरक्षण उपलब्ध करवाया गया. राज्य सरकार द्वारा आरक्षण नीति का पुन: परीक्षण किया गया तथा दिनांक 12 सितम्बर, 1991 को आदेश जारी किया गया कि अन्तिम निर्णय लिए जाने तक, दिनांक 5 अप्रैल, 1991 को जारी किए गए पत्र से पूर्व विद्यमान स्थिति के अनुसार भर्ती की जाएगी.
राज्य सरकार द्वारा पहली अक्तूबर, 1993 को भारत के उच्च न्यायालय में शपथ-पत्र भी प्रस्तुत किया गया कि हरियाणा सरकार द्वारा गुरनाम सिंह आयोग की सिफारिशों के अनुसरण में किए गए सभी आरक्षणों को रोक दिया गया है तथा कहा गया कि जातियों को शामिल करने तथा निकालने हेतु विचार करने, परीक्षण करने के लिए एक स्वतन्त्र आयोग का गठन किया जा रहा है. राज्य सरकार द्वारा रामजी लाल, पूर्व सांसद की अध्यक्षता में द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया, जो बाद में देशराज कम्बोज से प्रतिस्थापित किया गया तथा इस आयोग की सिफारिशों पर राज्य सरकार द्वारा अपनी अधिसूचना संख्या 1170-एसडब्ल्यू(1)-95, दिनांक 7 जून, 1995 द्वारा पिछड़े वर्ग की सूची में पांच जातियों अर्थात् अहीर/यादव, गुज्जर, सैनी, मेव, लोध तथा लोधा को शामिल किया गया तथा आगे मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार द्वारा दिनांक 6 जून, 1995 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक के अनुमोदन के बाद दिनांक 20 जुलाई, 1995 को अनुदेश जारी किया गया जिसमें पिछड़े वर्गों को दो ब्लाकों ‘ए’ तथा ‘बी’ में विभक्त किया गया था तथा राज्य के पिछड़े वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध करवाया गया. इसके अन्तर्गत 16 प्रतिशत आरक्षण उपरोक्त यथा संदर्भित ब्लॉक ‘ए’ (67 जातियां) तथा 11 प्रतिशत ब्लॉक ‘बी’ (6 जातियां) को उपलब्ध करवाया गया था.
चूंकि ,राज्य सरकार ने न्यायाधीश गुरनाम सिंह आयोग की रिपोर्ट की सिफारिशों पर, 5 जातियों अर्थात् जाट, जट-सिक्ख, रोड, बिश्नोई तथा त्यागी को पहले ही लाभ का विस्तार कर दिया था. इस प्रकार, इन जातियों को दिनांक 5 फरवरी, 1991 को पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल किया गया था तथा इन जातियों को आरक्षण का विस्तार दिनांक 5 अप्रैल, 1991 को किया गया था. हालांकि, बाद में, सरकार द्वारा ये अधिसूचनाएं दिनांक 12 सितम्बर, 1991 को वापस ले ली गई थी.
तभी से, सरकारी नौकरी तथा शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार को पिछड़े वर्गों की सूची में जातियों को शामिल करने के लिए विभिन्न क्वार्टरों से विभिन्न प्रतिवेदन प्राप्त हो रहे थे. इसलिए हरियाणा सरकार द्वारा अपनी अधिसूचना संख्या दिनांक 8 अप्रैल, 2011 द्वारा माननीय न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) के. सी. गुप्ता की अध्यक्षता में हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग का पुन: गठन किया गया. इस आयोग के संदर्भ की शर्तें पिछड़े वर्गों की सूची में जातियों को शामिल करने तथा निकालने के लिए आवेदनों को ग्रहण करने, परीक्षण करने तथा उन पर सिफारिश करने की थी. इस सम्बन्ध में माननीय न्यायाधीश (सेवानिवृत्त)श्री के०सी० गुप्ता द्वारा महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक से अध्ययन करवाया गया तथा आयोग द्वारा 12 दिसम्बर, 2012 को अपनी सिफारिशें सरकार को प्रस्तुत की गई. मन्त्री परिषद द्वारा 12 दिसम्बर, 2012 को आयोजित बैठक में आयोग की सिफारिशें स्वीकृत कर ली गई. मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार द्वारा अपने अर्ध सरकारी पत्र दिनांक 14 दिसम्बर, 2012 द्वारा अन्य पिछड़े वर्गों की केन्द्रीय सूची में शामिल करने के लिए मामला भारत सरकार को भेजा गया.
न्यायाधीश(सेवानिवृत्त) के०सी० गुप्ता आयोग की रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद, राज्य सरकार की संतुष्टि हो गई कि आयोग की रिपोर्ट निर्धारित डाटा तथा मजबूत साक्ष्य पर आधारित है जो सूचित करते हैं कि न केवल उक्त पांच जातियां/वर्ग सामाजिक तौर पर तथा शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्ग हैं तथा वे इन्दिरा साहनी (सी०डब्ल्यू०पी० 1990 का 930) में सुझाए गये सभी विधिक मानकों का भी पालन करते हैं. इन्दिरा साहनी मामले के पैरा 810 के निबंधनों में 50 प्रतिशत के सामान्य नियम की छूट में इन जातियों तथा वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना राज्य के लिए अनिवार्य है.
यहां यह भी वर्णित करना उचित होगा कि हरियाणा में आरक्षण पहले ही भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यथाविहित 50 प्रतिशत से ज्यादा है, तथापि र्इिन्दरा साहनी के मामले द्वारा स्थापित विधि कार्यकारी या विधायी शाखाओं द्वारा वर्गों को आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए शक्तियों को सीमित नहीं करती है. इस निर्णय के अनुसार आरक्षण किसी विशेष वर्ष में किसी ग्रेड, संवर्ग या सेवा में नियुक्तियों के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. असाधारण कारणों से ही यह प्रतिशतता अधिक हो सकती है. तथापि, 50 प्रतिशत से अधिक वैध आधार पर न्यायसंगत ठहराया जाएगा, जो विशेष रूप से किया जायेगा. उक्त निर्णय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विशेष रूप से यह कहा गया है:- ‘प्रतिनिधित्व की उपयुक्तता केवल सेवाओं में पिछड़े वर्गों की समग्र संख्यात्मक शक्ति के आधार पर ही निर्धारित नहीं की जाती. उपयुक्तता के निर्धारण के लिए, प्रशासन के विभिन्न स्तरों तथा विभिन्न ग्रेडों में उनके प्रतिनिधित्व का ध्यान रखा जाता है. प्रशासन में कुल संख्या नहीं, बल्कि प्रभावी आवाज ही प्रतिनिधित्व की उपयुक्तता निर्धारित करती है.’
इसलिए कई वर्षों से सामाजिक तथा शैक्षणिक पिछड़ेपन से ग्रस्त हरियाणा की जनसंख्या की अधिकतम प्रतिशतता ने आरक्षण नीति का लाभ लेना शुरू कर दिया है तथा अपने जीवन स्तर मेें सुधार करने तथा बेहतर जीवन स्तर हासिल करने में सक्षम हो गई है. इसलिए इसे ऐसे लोगों की जरूरतों के दृष्टिगत बढ़ाया जाना चाहिए, जिनका शैक्षणिक के साथ-साथ सामाजिक रूप से पिछड़ेपन के दृष्टिगत हरियाणा की आरक्षण नीति में प्रतिनिधित्व नहीं है या प्रतिनिधित्व के अधीन हैं और इसलिए इन्हें पिछड़े वर्ग ब्लॉक (सी) के रूप में समझा जाये.
यह अधिनियम हरियाणा पिछड़ा वर्ग (सेवाओं तथा शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले में आरक्षण)अधिनियम, 2016 कहा जाएगा.
नियुक्तियां करते समय तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए, आरक्षण सूची में यथाविनिर्दिष्टï पिछड़े वर्गों के सदस्यों के लिए किया जाएगा. अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित सीटों के समक्ष शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए पिछड़े वर्गों के क्रीमी लेयर से सम्बन्धित किसी व्यक्ति पर विचार नहीं किया जाएगा या अनुसूची में यथाविनिर्दिष्ट पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित पदों के समक्ष राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्ति हेतु आरक्षण के दावे का हकदार नहीं होगा या विचार नहीं किया जाएगा. सरकार, अधिसूचना के द्वारा, सामाजिक तथा आर्थिक तथा ऐसे अन्य घटकों, जैसाकि उचित समझे, पर विचार करने के बाद क्रीमी लेयर के रूप में पिछड़े वर्ग से सम्बन्धित व्यक्तियों को निकालने के लिए मानदण्ड तथा पहचान विनिर्दिष्ट करेगी. उपधारा 2 के अधीन नियत मानदण्डों की प्रत्येक तीन वर्ष के बाद समीक्षा की जाएगी. राज्य सरकार समय-समय पर, जैसा यह आवश्यक समझे, पिछड़े वर्गों में व्यक्तियों के ऐसे प्रवर्ग या प्रवर्गों के लिए होरिजोंटल आरक्षण उपलब्ध करवा सकती है.

By: जगविंदर पटियाल, एबीपी न्यूज |
Last Updated: Tuesday, 29 March 2016 2:15 PM
Source: http://abpnews.abplive.in/india-news/jat-reservation-bill-passed-in-haryana-assembly-350556/

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Don't have account. Register

Lost Password

Register