कर्नाटक विधानसभा ने 21 विधायकों की सैलरी रोकी

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निरंजन कागरे, बेंगलुरु
कर्नाटक राज्य विधानसभा ने सोमवार को लाभ के पद पर आसीन होने के आरोपी 21 विधायकों की सैलरी रोकने का आदेश देकर उन्हें सकते में डाल दिया। राज्य सचिवालय के अकाउंट विंग ने इसी आरोप में विधायकों के विभिन्न भत्ते भी रोकने के आदेश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि राज्य विधानसभा के इतिहास में इस तरह का फैसला पहली बार लिया गया है। यह फैसला ऐडवोकेट जनरल और अकाउंटेंट जनरल की राय के बाद लिया गया।

 

राज्य सचिवालय के सूत्रों ने बताया कि लाभ के पद पर आसीन होने का भ्रम उस समय शुरू हुआ, जब राज्य सरकार ने कुछ विधायकों को विभिन्न राज्य बोर्डों और निगमों का अध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने कहा, ‘सरकारी आदेश के मुताबिक, नियुक्ति के बाद इन विधायकों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है और उन्हें हाउस रेंट, यात्रा, टेलीफोन और मेडिकल भत्ते का भुगतान किया गया। इनमें से कुछ विधायकों ने राज्य सचिवालय को पत्र लिखकर उनसे विधायक के रूप में अपनी सैलरी और भत्ता मांगा था।’

 

उन्होंने बताया कि उनके राज्य बोर्डों के द्वारा दिए जा रहे पारिश्रमिक से अलग था। इस बात को लेकर भ्रम था कि क्या इन विधायकों को सचिवालय से वेतन दिया जाए या उन्हें अपने अपने बोर्ड से पैसा लेने के लिए कहा जाए। इस भ्रम को दूर करने के लिए विधानसभा सचिवालय ने कर्नाटक के ऐडवोकेट जनरल और अकाउंटेंट जनरल से राय मांगी थी और उनसे इस भ्रम को दूर करने के लिए कहा था।

 

सचिवालय को भेजे अपने उत्तर में ऐडवोकेट जनरल ने कहा, ‘कर्नाटक विधानसभा वेतन, पेंशन और भत्ता कानून 1956 की धारा 13 के नियम बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों पर लागू होंगे। इसलिए वे विधायक के रूप में अतिरिक्त वेतन और भत्ते के लिए हकदार नहीं होंगे। उन्हें सिर्फ किसी बोर्ड या निगम के चेयनमैन का ही वेतन और भत्ता मिलेगा। इस सलाह के बाद 21 विधायकों के वेतन और भत्ते तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।’

 

source: navbharat times

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