उत्तराखंडः विनियोग विधेयक पर कम नहीं हुई सरकार की मुश्किलें, राजभवन को भेजा पत्र

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उत्तराखंडः विनियोग विधेयक पर कम नहीं हुई सरकार की मुश्किलें, राजभवन को भेजा पत्र

लेखानुदान से छटपटा रही राज्य सरकार ने विनियोग विधेयक को लेकर राजभवन में गुहार लगाई है। राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल को भेजे पत्र में राष्ट्रपति शासन हटने का हवाला देते हुए विनियोग वि

देहरादून। लेखानुदान से छटपटा रही राज्य सरकार ने विनियोग विधेयक को लेकर राजभवन में गुहार लगाई है। राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल को भेजे पत्र में राष्ट्रपति शासन हटने का हवाला देते हुए विनियोग विधेयक पर मुहर लगाने का अनुरोध किया गया है। सरकार की नजरें राज्यपाल के रुख पर टिकी हैं। उधर, राज्यपाल ने सरकार के अनुरोध को नहीं माना तो विधानसभा सत्र बुलाकर नए विनियोग विधेयक को पेश करना उसकी मजबूरी होगा। ऐसे में उसे एक बार फिर अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है।

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मुख्यमंत्री हरीश रावत के गांव, गरीब, गाड-गदेरे, गहत-गलगल, गुरुजी, गन्ना-गुड़, गाय-गौशाला-गौचर के चुनावी एजेंडे पर फोकस कर तैयार किए गए विनियोग विधेयक को राष्ट्रपति ने अभी तक राज्य को लौटाया नहीं है।
बीती 18 मार्च को कांग्रेस सरकार में बगावत के चलते विनियोग विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ दल कांग्रेस और भाजपा में खींचतान बनी हुई है। कांग्रेस से बगावत करने वाले विधायक अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। विधानसभा में पारित विनियोग विधेयक को मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा गया था।

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विवाद का विषय बने विनियोग विधेयक को मंजूरी देने के बजाय राज्यपाल ने उसे राष्ट्रपति को भेज दिया था। इस बीच राष्ट्रपति शासन के चलते प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था लेखानुदान के भरोसे चल रही है। लेखानुदान ने मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस के चुनावी एजेंडे की राह में बाधा खड़ी कर दी है।
प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटने के बाद बहाल हुई हरीश रावत सरकार विनियोग विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी दिलाने की कोशिश में जुटी है। दरअसल, राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी मिली तो सरकार की मुश्किलें काफी हद तक दूर हो सकती हैं।
लिहाजा विनियोग विधेयक को मंजूरी दिलाने को सरकार ने राज्यपाल को पत्र भेजा है। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने पत्र भेजने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पत्र में राष्ट्रपति शासन हटने का हवाला देते हुए विनियोग विधेयक को मंजूरी देने का अनुरोध किया गया है।

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उन्होंने कहा कि राज्यपाल से विधेयक को मंजूरी मिली तो लेखानुदान की दिक्कत दूर हो जाएगी। अलबत्ता, राज्यपाल की मंजूरी नहीं मिलने की स्थिति में सरकार को अन्य विकल्प पर विचार करना पड़ेगा। राज्य का बजट दोबारा से तैयार किया जाएगा या नहीं, यह राजभवन के रुख से तय होगा।
गौरतलब है कि राजभवन ने उक्त विधेयक पर मुहर नहीं लगाई तो सरकार को दोबारा विधानसभा का सत्र बुलाकर नए सिरे से विनियोग विधेयक को पारित कराना पड़ सकता है। ऐसे में एक बार फिर विधेयक को लेकर मत विभाजन की नौबत आ सकती है। एक बार झटका खा चुकी सरकार पर इससे मनोवैज्ञानिक दबाव बढऩा तय माना जा रहा है।
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31 May 2016 04:28:24 GMT
Source: http://www.jagran.com/uttarakhand/dehradun-city-14091534.html

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