वायरल सच: भारतीय रेल पर वायरल हो रहे एक मैसेज की सच्चाई जरूर जानें

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नई दिल्ली: भारतीय रेल पर वायरल हो रहे एक मैसेज की सच्चाई पढिए. दावा है कि एक जुलाई से रेलवे के 7 नियम बदलने जा रहे हैं. देखते हैं ये कौन से नियम हैं और कितने सच हैं?
हर रोज करीब 19 हजार से ज्यादा ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती हैं और 2 करोड़ से ज्यादा यात्री सफर करते हैं. पैसेंजर, सुपरफास्ट या फिर राजधानी किसी न किसी से तो आपका पाला पड़ता ही है. इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस मैसेज का सच जानना आपके लिए जरूरी है जिसमें दावा किया जा रहा है कि अगर आप रेलवे में सफर करते हैं.
तो जरा इस खबर को ध्यान से पढ़े क्योंकि इस खबर को आपने अगर मिस कर दिया तो आपको परेशानी हो सकती है. 1 जुलाई से रेलवे में कई बदलाव होने वाले हैं. मैसेज में सात दावे किए गए हैं. हम बारी-बारी मैसेज का हर दावा और उसका सच आपको बताएंगे.
पहला दावा है कि 1 जुलाई से वेंटिंग लिस्ट का झंझट खत्म हो जाएगा और रेलवे की ओर से चलाई जाने वाली सुविधा ट्रेनों में यात्रियों को कन्फर्म टिकट की सुविधा दी जाएगी.
हमारी पड़ताल में पहला दावा झूठ है 1 जुलाई से ऐसा कुछ होने नहीं जा रहा.
दूसरा दावा है कि एक जुलाई से तत्काल टिकट के नियमों में बदलाव हुआ है. सुबह 10 से 11 बजे तक एसी कोच के लिए टिकट बुक होगा जबकि 11 से 12 बजे तक स्लीपर कोच की बुकिंग होगी. हमारी पड़ताल में सामने आया है कि ये व्यवस्था पहले से ही लागू है.
तीसरा दावा है कि एक जुलाई से राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में पेपरलेस टिकटिंग की सुविधा शुरु हो रही हैं. अब आपके मोबाईल पर टिकट भेजा जाएगा जबकि सच ये है कि ये व्यवस्था भी पहले से लागू है
चौथा दावा शताब्दी और राजधानी में कोच बढ़ाने को लेकर है लेकिन ये दावा भी झूठा निकला है.
पांचवां दावा है कि रेल में बेहतर सुविधा देने के लिए वैकल्पिक रेलगाड़ी समायोजन प्रणाली, सुविधा ट्रेन शुरू करने और डुप्लीकेट गाड़ी चलाने की योजना है हमारी पड़ताल में
सामने आया कि ये सारी व्यवस्था पहले से ही मौजूद है इसमें कुछ नया नही है
छठा दावा भी शताब्दी की तर्ज पर नई सुविधा ट्रेन चलाने को लेकर है जो पहले से ही चल रही है.
सातवां और आखिरी दावा ये है कि एक जुलाई से रेलवे प्रीमियम ट्रेनों को पूरी तरह से बंद करने जा रहा है हमारी पड़ताल में ये दावा भी झूठा साबित हुआ है.
सच जानने के लिए एबीपी न्यूज ने रेल मंत्रालय के पीआरओ अनिल सक्सेना से बात की.
अनिल सक्सेना ने कहा कि रेलवे की ऐसी कोई तारीख फिक्स नहीं होती कि हम सारे परिवर्तन करें. उन्होंने कहा कि पहले एक जुलाई की तारीख हुआ करती थी जब रेलवे का टाइमटेबल बदलता था, लेकिन अब उसकी तारीख भी बदल गई है और नया टाइमटेबल अक्टूबर-नवंबर में आता है. पीआरओ ने बताया कि पुरानी तारीख को लेकर मैसेज वायरल होते रहते हैं जिसमें 15-16 प्वाइंट में किसी एक प्वाइंट की कोई आधी बात सच होती है, बाकी अक्सर ये प्वाइंट गलत होते हैं.
एबीपी न्यूज की पड़ताल में वायरल हो रहा ये मैसेज झूठा साबित हुआ है.

By: एबीपी न्यूज |
Last Updated: Monday, 9 May 2016 11:01 PM
Source: http://abpnews.abplive.in/india-news/viral-sach-truth-about-this-viral-message-371943/

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