अरब देशों में खरीदी जा रही है रेत, जानें क्यों

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जब भी कोई रेगिस्तानी इलाके में फोटो खिंचवाता होगा शायद उसके दिमाग में यह बात नहीं आती होगी कि एक दिन ये रेगिस्तान खत्म हो जाएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानी के बाद रेत ऐसा दूसरा प्राकृतिक संसाधन है जिसका जमकर इस्तेमाल हो रहा है। हर तरह के निर्माण कार्यों में रेत की जरूरत है और स्थिति तो यह है कि दुबई और संयुक्त अरब अमीरात जैसे रेगिस्तान वाले देशों को भी अपनी चमकदार इमारतें तैयार करने के लिए दूसरे देशों से रेत आयात करनी पड़ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह रेत का अवैध खनन है।

साइंस जर्नल में छपी एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक हद से ज्यादा रेत खनन होने की वजह से अब पर्यावरण और समुद्री जीवों तक पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कई देशों में तो रेत की बेलगाम मांग पूरी करने के चक्कर में अभी से ही रेत के अभाव का संकट पैदा हो गया है। उदाहरण के लिए वियतनाम में रेत की घरेलू मांग देश के कुल रेत भंडार को पार कर गई है। अगर यही हिसाब जारी रहा तो देश में 2020 के बाद निर्माण कार्यों में रेत का इस्तेमाल बहुत मुश्किल हो जाएगा। दुबई को ऑस्ट्रेलिया से रेत आयात करना पड़ रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात ने साल 2014 में रेत और कंकड़ आयात करने के लिए 45.6 करोड़ डॉलर खर्च किए थे।

कॉन्क्रीट, सड़कें, शीशा और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने के लिए रेत का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। भूमि सुधार परियोजनाओं, शेल गैस निष्कर्षण जैसे कामों के लिए बड़ी मात्रा में रेत खनन होता है। हाल ही में अमेरिका के ह्यूस्टन, भारत, नेपाल और बांग्लादेश में आई बाढ़ की वजह से भी दुनिया भर में रेत की मांग बढ़ेगी।

साल 2011 में 11 अरब टन रेत का खनन सिर्फ निर्माण कार्यों के लिए किया गया था। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में खनन दर सबसे ज्यादा है, इसके बाद यूरोप और अमेरिका का नंबर आता है। हर साल कुल 40 अरब टन रेत खनन किया जाता है। इतना ही नहीं रेत खनन का बाजार 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक रेत खनन की वजह से पर्यावरण को बहुत खतरा पैदा हो गया है। चीन की सबसे बड़ी झील, प्योंगयांग की झील सिर्फ रेत खनन की वजह से ही सूखने की कगार पर पहुंचने वाली हैं। केन्या में नदी किनारे हो रहे रेत खनन की वजह से कई समुदाय अब बिना पानी के जीने को मजबूर हैं। केरल की पंपा, मणिमाला और अचनकोविल जैसी प्रमुख नदियों के किनारे हो रहे रेत खनन की वजह से जलस्तर कम हो रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि समुद्री तटों पर हो रहे रेत खनन की वजह से मछली, डॉलफिन, मगरमच्छ जैसे जानवरों की कई प्रजातियों पर प्रतिकूल असर हो रहा है।

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