रूस नेे ISIS के टॉप कमांडर्स पर गिराया ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब’, 12 से अधिक की मौत

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सीरिया: रूस की सेना ने दुनिया के खतरनाक आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएसआइएस) के शीर्ष कमांडर्स पर ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब’ से हमला किया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि व्लादिमिर पुतिन की सेना ने सीरिया के पूर्वी शहर देर अल-ज़ोर में इस्लामिक स्टेट के नेताओं के ऊपर सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम गिराया है. इससे पहले रूस ने 8 सितंबर को सीरिया में इस्लामिक स्टेट के चार शीर्ष कमांडर को मारने का दावा किया था. रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि उनके सैनिकों ने सीरिया के पूर्वी शहर देर अल-ज़ोर के बाहर एक हवाई हमले में आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के चार नेताओं को मार गिराया. रूस की समाचार समितियों ने शुक्रवार (8 सितंबर) को रक्षा मंत्रालय के एक बयान के हवाले से बताया कि हवाई हमले में 40 आतंकवादी मारे गए. रिपोर्टों के अनुसार, इनमें आतंकवादी नेता अबू मुहम्मद अल-शिमाली और गुलमुरोद खलीमोव शामिल हैं.

ऐसा कहा जाता है कि अल-शिमाली सीरिया में विदेशी लड़ाकों के अभियान का नेतृत्व कर रहा था और संगठन के लिए नई भर्तियां कर रहा था. इस शहर में सीरिया के सरकारी बलों और इस्लामिक स्टेट के बीच भारी संघर्ष चल रहा है. आतंकवादियों ने इस शहर पर वर्षों से कब्जा जमा रखा है. राष्ट्रपति बशर अल असद के सैनिकों ने मंगलवार (5 सितंबर) को शहर के हिस्सों को आतंकवादियों के कब्जे से मुक्त कराया जो आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़ी बढ़त मानी जा रही है.

रूस ने कहा, सीरिया में होना चाहिए आंतकवादियों का खात्मा

रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव का कहना है कि सीरियाई सरजमीं से आतंकवाद फैला रहे आतंकवादियों का खात्मा होना चाहिए. इससे पहले कि वे यहां से बचकर निकल भागे या दूसरे देशों के लिए खतरा बने. समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, लावरोव ने शुक्रवार (8 सितंबर) को मॉस्को में फ्रांसीसी समकक्ष जीन युवेस ली ड्रायन के साथ एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बयान दिया.

लावरोव ने कहा, “हम फ्रांस की इस चिंता से सहमत हैं कि आंतकवादी सीरिया से यूरोप, एशिया या रूस भागकर नए खतरे पैदा कर सकते हैं. सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत, स्टाफान डी मिस्तूरा, जिनेवा में सीरियाई सरकार के प्रतिनिधियों और ‘मॉडरेट’ विपक्ष के बीच एक नए दौर की वार्ता को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में थे.

रूसी राजनयिक ने कहा कि रूस और फ्रांस दोनों राजनयिक तरीकों से सीरियाई संघर्ष खत्म करने की जरूरत पर सहमत हैं. इस पर ली ड्रायन ने कहा कि सीरिया में राजनीतिक बदलाव के लिए सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की बर्खास्तगी जरूरी शर्त नहीं होनी चाहिए.



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