एनएसजी में भारत की एंट्री के विरोध में चीन…अंतिम फैसला आज

nsg

नई दिल्ली । भारत एनएसजी सदस्यता के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है । वहीं चीन अपनी तरफ से भारत को रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। गुरूवार रात को एनएसजी डिनर मीटिंग में चीन ने खुलकर भारत के विरोध का नेतृत्व किया । चीन ने बार बार कहा है कि भारत की सदस्यता एजेंडा में नहीं है और समझा जाता है कि भारत की कोशिशों पर किसी भी चर्चा को रोकने के लिए हर कोशिश की। हालांकि, यह भी समझा जाता है कि जापान ने सुबह के सत्र में भारत का मामला उठाया जिसके बाद वह राजी हुआ।

चीन के साथ ऑस्ट्रिया, आयरलैंड और ब्राजील समेत अन्य देशों ने सवाल किया कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर दस्तखत नहीं करने वाले भारत जैसे देश को समूह में कैसे शामिल किया जा सकता है?

यहां सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ब्राजील का विरोध है ब्राजील ब्रिक्स का सदस्य है जिसमें भारत और ब्राजील के अलावा समूह में रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। यहां पर मौजूद विदेश सचिव एस जयशंकर ने इससे पहले ब्राजीली प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की थी। अधिकारियों ने बताया कि चर्चा बेनतीजा रही और आज अधिवेशन के समाप्त होने के पहले ही कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

चीन का कहना है कि बिना एनपीटी पर साइन करें भारत और पाकिस्तान को कैसे एनएसजी की सदस्यता मिल सकती है । चीन के बाद अब स्विटजरलैंड भी भारत का विरोध करने वाले देशों की लिस्ट में सामिल हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन से भारत की एनएसजी सदस्यता की कोशिश का समर्थन करने का अनुरोध किया। मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ताशकंद में मुलाकात की।

मोदी का अनुरोध चीन के रुख में बदलाव नहीं ला पाया लेकिन एनएसजी की दो दिवसीय पूर्ण बैठक के आखिरी दिन आज क्या होता है उसे देखना फिलहाल बाकी है। भारत के मामले पर जोर देने के लिए विदेश सचिव एस जयशंकर के नेतृत्व में भारतीय राजनयिक सोल में हैं। हालांकि, भारत की सदस्यता के अभाव में वे पूर्ण बैठक में प्रतिभागी नहीं हैं। लेकिन उन्होंने इस सिलसिले में कई प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से मुलाकात की। पूर्ण बैठक में 48 सदस्य देशों के करीब 300 प्रतिभागी शरीक हो रहे हैं जिसके पहले आधिकारिक स्तर का सत्र 20 जून को शुरू हुआ था।

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